आयु वर्ग: U14
फोकस: शूटिंग
अवधि: 64 मिनट
ड्रिल्स: 8
हाई-वॉल्यूम शूटिंग वर्कआउट जो गेम शॉट्स की विविधता को दोहराता है। कैच-एंड-शूट, ऑफ-द-ड्रिबल, ऑफ-द-स्क्रीन, ऑफ-द-पास।
जोड़ियां, 5 मीटर की दूरी पर। 20 चेस्ट पास, 20 बाउंस पास, 20 ओवरहेड पास, 20 वन-हैंडेड पुश पास (हर हाथ से 10)।
बेसिक्स वार्मअप जो हर कोच को हर प्रैक्टिस में करवाना चाहिए। टर्नओवर से बचाव गारंटीड।
पाँच निर्धारित स्पॉट: दोनों कोने, दोनों विंग्स, की के ऊपर। खिलाड़ी को अगले स्पॉट पर जाने से पहले हर स्पॉट से 5 शॉट सफल करने होंगे। कोच पूरे समय को मापेगा। दीवार पर पर्सनल बेस्ट ट्रैक करो।
शूटिंग ड्रिल जो फ्लोर के हर स्पॉट से टच बनाता है।
कोच या पार्टनर रिबाउंडर बास्केट के नीचे से परिधि पर शूटर को पास देता है। शूटर शूटिंग पोजीशन में कैच करता है, पैर सेट करता है, उठता है और शूट करता है — कोई ड्रिबल नहीं, कोई हिचकिचाहट नहीं।
आधुनिक बास्केटबॉल में सबसे आम शॉट: कैच-एंड-शूट थ्री किक-आउट से।
शूटर बेसलाइन से शुरू करता है। बिग एल्बो पर डाउनस्क्रीन सेट करता है। शूटर स्क्रीन से तेज़ी से निकलता है, विंग पर शूटिंग पोजिशन में पास पकड़ता है, उठता है और शूट करता है।
हर ऑफ-बॉल शूटिंग एक्शन की बुनियाद। रे एलन से लेकर क्ले थॉम्पसन तक हर शानदार शूटर इसका इस्तेमाल करते हैं।
बेसलाइन से विंग तक स्प्रिंट करो। चलते हुए पास कैच करो, जंप-स्टॉप, कंधों को सीधा करो, एक ही मूवमेंट में शूट करो।
गेम के शॉट्स पूरी स्पीड पर होते हैं। स्टेशनरी कैच-एंड-शूट और रियल मोशन कैच-एंड-शूट के बीच का गैप भरता है।
आर्क के चारों ओर 5 जगहों पर 5 गेंदों की 5 रैक। सभी 25 को 60 सेकंड में शूट करें। हर बार बनाना = 1 पॉइंट; हर रैक की आखिरी गेंद 2 पॉइंट की मनी बॉल है। सर्वोच्च स्कोर = 30।
NBA ऑल-स्टार कॉन्टेस्ट जैसा। शूटिंग स्पीड, थकान प्रतिरोध, प्रेशर।
हर खिलाड़ी कठिन फिजिकल टास्क (10 पुश-अप्स, स्प्रिंट्स, रिबाउंड्स) के बाद दो फ्री थ्रो डालता है। टीम का सबसे बेहतर प्रतिशत अगले स्प्रिंट में बैठ जाता है।
मैच के आखिरी पलों की थकान को दोहराता है। ज्यादातर मिस्ड फ्री थ्रो 4-2 पर 6 सेकंड बचे होते हैं, शांत ड्रिल्स में नहीं।
प्रैक्टिस के अंत में: 30 सेकंड प्रत्येक, टो टच, क्वाड स्ट्रेच, हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच, कॉफ स्ट्रेच, लंज स्ट्रेच, कोबरा बैक स्ट्रेच, शोल्डर रोल्स। कुल 4 मिनट।
ज्यादातर कोच इसे स्किप करते हैं। मत करो। रिकवरी यहीं से शुरू होती है। जो खिलाड़ी लगातार स्ट्रेच करते हैं वो दर्द से कम प्रैक्टिस मिस करते हैं।